अर्थशास्त्र (Economics)
By Vivek Singh
अर्थशास्त्र का अर्थ धन का शास्त्र
परिभाषा- अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो मानव व्यवहार उनकी इच्छाओं आवश्यकताओं को उपलब्ध संसाधनों मैं वैकल्पिक प्रयोग के संबंधों का अध्ययन करता है। (प्रो. रॉबिंस)
अर्थशास्त्र के पिता (father of economics)- एडम स्मिथ ( ब्रिटिश अर्थशास्त्री) BOOK- wealth of nation 1776
Part of economics
1) व्यष्टि अर्थशास्त्र / microeconomics
२) समष्टि अर्थशास्त्र/ macroeconomics
1) Microeconomics/ व्यष्टि अर्थशास्त्र
- इसको सूक्ष्म अर्थशास्त्र भी कहते हैं इसके अंतर्गत व्यक्तिगत इकाइयों परिवार, उपभोक्ताओं, उद्योगों, व्यक्तिगत फर्मो का अध्ययन किया जाता है इसमें वस्तुओं के मूल्य एवं उत्पादन की मात्रा का निर्धारण किया जाता है
- इसमें अर्थव्यवस्था के सभी चारों का समग्र अध्ययन किया जाता है जो पूरे अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है बेरोजगारी जीडीपी मुद्रास्फीति भुगतान संतुलन राजकोषीय नीति इत्यादि क्षेत्रों का अध्ययन किया जाता है।
मुद्रास्फीति/ inflation
:-Definition- जब सामान्य कीमत स्तर लगातार बड़े एवं मुद्रा की क्रय शक्ति कम हो जाए तो उस स्थिति को मुद्रास्फीति या महंगाई कहते हैं।
:-मौद्रिक आय तथा वास्तविक आय में असंतुलन होने के कारण मुद्रास्फीति की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
:- पूरे देश में लोगों के पास जो मुद्रा उपलब्ध है उसे तरलता कहते हैं और उस तरलता में वृद्धि होने पर बाजार में मांग बढ़ जाती है और आपूर्ति कम हो जाती है उस स्थिति में मुद्रास्फीति उत्पन्न हो जाती है।
मुद्रा की पूर्ति मैं वृद्धि/money supply
बाजार में तरलता में वृद्धि/high liquidity
मांग में वृद्धि/demand increase
सामान्य कीमत में वृद्धि/general price level increase
मुद्रा की क्रय शक्ति में कम/purchasing power of money decrease
कारण - मुद्रास्फीति/inflation
मुद्रास्फीति के प्रभाव:- demand>supply
बाजार में मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि
बाजार में मांग पूर्ति से ज्यादा हो जाता है
बाजार में स्टॉक में कमी हो जाती है
कंपनियों में प्रोडक्शन में वृद्धि
रोजगार में वृद्धि
आय में वृद्धि
जीडीपी में वृद्धि
अर्थव्यवस्था में वृद्धि
मुद्रास्फीति के प्रकार
१) मांग प्रेरित मुद्रास्फीति :- जब पूरे देश में मुद्रा की पूर्ति बढ़ जाती है एवं बाजार में मांग पुर्ती (Demand>Supply) से ज्यादा हो जाती है इसको मांग प्रेरित मुद्रास्फीति कहते हैं
कारण:-
: लोगों की आय में वृद्धि होने के
: सरकार की व्यय वृद्धि
: बैंकों के द्वारा लोगों को अधिक ॠण दिए जाने से
बैंक दर कम होने से
: प्रत्यक्ष कर में कमी होने से बाजार में तरलता बढ़ जाती है
२) लागत प्रेरित मुद्रास्फीति:- जब उत्पादन के साधनों भूमि पूंजी श्रम आदि वृद्धि हो जाती है जिससे वस्तुओं का मूल्य में और सामान्य कीमत में वृद्धि हो जाती है जिससे बाजाार में लागत प्रेरित मुद्रास्फीति उत्पन्न हो जाती है।
कारण:-
: ईधन की कीमतों मेंं वृद्धि
: खाद्यान्न आपूर्ति में संकट
: प्राकृतिक आपदा
३) रेंगती मुद्रास्फीति/creeping inflation:- जब बाजार में वस्तुओं एवं सेवाओं का कीमत कीमतों में वृद्धि हो लेकिन 3% तक स्थिर हो उसे रेंगती मुद्रा स्थिति कहते हैं, यह उपभोक्ताओं के लिए अच्छा होता है।
४) चलती मुद्रास्फीति/ walking inflation: - जब वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य में वृद्धि हो लेकिन 4% से 5% तक स्थिर हो उसे चलती मुद्रास्फीति करतेे हैं यह उपभोक्ताओं एवं अर्थव्यवस्था दोनोंं के अच्छा होताा है।
५) दौड़ती मुद्रास्फीति/ running inflation:- जब वस्तुओं एवं सेवाओंं का मूल्य में वृद्धि लगातार हो और बढ़कर 9% पहुंच जाए तो उसेे दौड़ती मुद्रास्फीति कहते हैं यह उपभोक्ताओं केे लिए हानिकारक एवं अर्थव्यवस्था केे लिए लाभदायक होता है।
६) Glloping inflation:- जब वस्तुओं सेवाओं का मूल्य बढ़कर 10% को पार कर जाए एवं कभी-कभी 100% हो जाए उसी स्थिति में गैलोपिंग इन्फ्लेशन होता है।
७)Hyper inflation:- जब वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य बढ़कर बहुत ज्यादा हो जाए लगभग 1000% पहुंच जाए तो हाइपरइन्फ्लेशन होता है।
भारत में मुद्रास्फीति का मापन ( method of measuring inflation in India)
:- मुद्रास्फीति का मापन दो विधि से किया जाता है
१) Consumer price index (CPI)/ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक:- यह एक समय अवधि में प्रतिदिन उपयोग में लाई जाने वाली खुदरा वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य का मापन करता है, यह उपभोक्ताओं के महंगाई का मापन करता है।
वर्तमान आधार वर्ष:- 2012
पूर्व आधार वर्ष : - 2010
:- इसका मापन केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) करता है।
आधार वस्तुएं:-
१)खाद्य वस्तुएं:- यह वस्तुएं मुख्यत: से संबंधित होती हैं जो मानसून पर निर्भर होती हैं।
२) ऊर्जा एवं ईंधन से संबंधित वस्तुएं जिनका अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार चढ़ाव के कारण मुद्रास्फीति में परिवर्तन होता है।
:- CPI के अंतर्गत मापे जाने वाले वस्तु -
ग्रामीण क्षेत्र में- 448 वस्तुओं एवं सेवाऐं
शहरी क्षेत्र में - 460 वस्तुओं एवं सेवाएं
2) wholesale price index (WPI)/ थोक मूल्य सूचकांक:- यह एक समय अवधि में थोक वस्तुओं के कीमतों में प्रतिशत परिवर्तन का मापन करता है तथा थोक विक्रेताओं के लिए महंगाई बताता है।
:- इसमें सिर्फ वस्तुओं की कीमतों का मापन संभव होता है तथा सेवाओं का मापन नहीं होता है इसीलिए इसका प्रयोग मुद्रास्फीति मापने के लिए सही नहीं माना जाता है।
:- क्योंकि सेवाओं का थोक स्तर नहीं होता है इसीलिए इसको WPI शामिल नहीं किया जाता है।
:- उपभोक्ता खुदरा स्तर से जुड़े होते हैं जबकि WPI थोक स्तर को ध्यान में रखता है इसीलिए भारत में CPI का प्रयोग अधिक उचित माना जाता है क्योंकि इसमें खुदरा स्तर पर मापन एवं वस्तुओं एवं सेवाओं दोनों का समावेश होता है।
:- वर्तमान आधार वर्ष 2011-12
:- पूर्व आधार वर्ष 2004-05 ,1993-94
:-WPI सूचकांक में 696 वस्तुएं वर्तमान में शामिल हैं इसके पहले 676 वस्तुएं शामिल थे।
:- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया महंगाई दर के लिए सीपीआई को आधार बना रहा है।
मुद्रास्फीति से प्रभावित वर्ग
१) लाभान्वित वर्ग:- ऋणी लोग/देनदार इस वक्त लाभ में रहते हैं
:- कृषक उत्पादक तथा व्यापारी लाभान्वित होते हैं
:- मुद्रास्फीति से उपभोक्ता को हानि होती है।
:- रोजगार में वृद्धि होती है
:- मुद्रास्फीति से अर्थव्यवस्था में वृद्धि होती है
२) प्रभावित वर्ग/ हानि
:- लेनदार/ऋण दाता को हानि होती है
:-गरीबों को हानि होती है।
Deflation/ अपस्फीति
:- यह मुद्रास्फीति के विपरीत स्थिति है इसमें सामान्य कीमतें लगातार कम होने लगती हैं और मुद्रास्फीति 0 से नकारात्मक हो जाती है इस स्थिति को अपस्फीति कहा जाता है।
अपस्फीति के प्रभाव
:- DEMAND< SUPPLY बाजार में मांग कम और पूर्ती ज्यादा हो जाती है।
:- बाजार में स्टाक में वृद्धि हो जाती है
उत्पादन कम हो जाता है
बेरोजगारी बढ़ने लगती है
आय कम हो जाती है
देश के जीडीपी में कमी आ जाती है।
मुद्रास्फीति जनित मंदी/ Stagflation
:- जब मुद्रास्फीति एवं मंडी एक साथ होती है उस स्थिति में बाजार में Stagflation हो जाता है।
:- इसमें बेरोजगारी की दर बहुत बढ़ जाती है
:-यह अर्थव्यवस्था के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति होती है
मुद्रास्फीति एवं अपस्फीति का नियंत्रण
१) मौद्रिक नीति/ Monetary policy
२) राजकोषीय नीति/Fiscal policy
मौद्रिक नीति/ Monetary policy
(मौद्रिक नीति आरबीआई के द्वारा )
A) मात्रात्मक उपाय/ Quantitative
B) गुणात्मक उपाय/ Qualitative
मात्रात्मक उपाय/Quantitative:-
1) Bank rate/बैंक दर
2) Repo rate/ रेपो रेट
3) Reverse Repo rate/ विपरीत रेपो रेट
4) Marginal standard facility/ सीमांत स्थाई सुविधा
5) Cash reserve Ratio/ नगद आरक्षित अनुपात
6) Statuatory liquidity ratio/वैधानिक तरलता अनुपात
7) Open market operation/ मुक्त बाजार प्रचलन
गुणात्मक उपाय/ Qualitative
1) Margin requirements/ सीमांत आवश्यकता
2) Rationing of credit/ शाखा का राशनिंग
3) Moral pressure/ नैतिक दबावपूर्ण
4) Direct action/ प्रत्यक्ष प्रहार
राजकोषीय नीति/ Fiscal policy
(राजकोषीय नीति गवर्नमेंट के द्वारा)
सरकार के व्यय
:- लोक कल्याण के कार्य जैसे स्कॉलरशिप, वृद्धा पेंशन विधवा पेंशन, रोजगार
:- सहायकी/ Subsidy
:- रक्षा पर/ Defence
:- लोक निर्माण के कार्य जैसे रोड , अस्पताल, पुल नहर
सरकार का व्यय
:- लोक ऋण, कर , विनिवेश

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें